Friday, April 17, 2009


खुश हुआ या उदास हुआ,एक ग़ज़ल लिखी
जब कोई दिन मेरा ख़ास हुआ ,एक ग़ज़ल लिखी

कोई घुलता था मेरी साँसों में
जब भी यह अहसास हुआ , एक ग़ज़ल लिखी

वो मुझसे दूर दूर रहता था
आज जब पास हुआ ,एक ग़ज़ल लिखी

जो भी पीछे था पीछे छूट गया
सामने दरिया और आकाश हुआ ,एक ग़ज़ल लिखी

2 comments:

confessionsatforty said...

This is very beautiful...like you!!

Gaurav Singh said...

Bohot achi hai .