Monday, May 18, 2009

गजल




जब से खोया उसे कुछ भी पाया नहीं
हादसों ने मुझे कुछ सिखाया नहीं

एक कागज पे मैंने वो सब लिख दिया
मेरे सीने मैं जो कुछ समाया नहीं

आज सूरज वही रोज जैसा उगा
रौशनी मैं मगर मैं नहाया नहीं

रास्ते की तरफ़ देखता मैं रहा
उसको आना न था , वो आया नहीं

जिंदगी यूँ गुजारी अजब ढंग से
काम पूरा किया , दिल लगाया नहीं
जितने शिकवे रहे मेरे दिल मैं रहे
मैंने उसको कभी कुछ बताया नहीं

वक्त को थाम लूँ , ऐसी कोशिश करी

हाथ आना न था ,हाथ आया नहीं

मुझ से नाराज वो उम्र भर यूँ रहा

दूर जा न सका, पास आया नहीं

Friday, May 15, 2009

तुम गए यूँ दूर मुझसे ,वक्त जैसे थम गया
ड़ाल से पंछी उडे ,फूलों का मौसम गया
उस पेड़ के नीचे मुझे अहसास तेरा जब हुआ
धुप ठंडी हो गई , तन्हाई का आलम गया