Thursday, April 23, 2009

मैं कभी खामोश बैठूँ ,कुछ गुनगुनाना जिंदगी

तुझसे अगर मैं दूर भागूँ , पास आना जिंदगी

जाने कितनी मंजिलें हैं , जाने कितने रास्ते

मुझको जाना किस डगर है तू बताना जिंदगी

चाह कर भी मैं कभी इनकार कर पाता नहीं

मैं जरा सीधा सा हूँ और वो सयाना जिंदगी

Monday, April 20, 2009

मैं जितना हूँ बेताब उतना तू बेताब तो नहीं, पर गुमान तो होता ही है ,

मैं तेरी तरफ देख नहीं पाता तो क्या ,तुझ पर मेरा ध्यान् तो होता ही है

कुछ सवालात मुझसे हर बार करती है,
जिंदगी फलसफों से इनकार करती है।

अपने होने का थोडा गुमान हो रहा है ,
एक लड़की मुझे भी प्यार करती है

मौके बहुत मुझको देती है जिंदगी,
यह रूकती है , थोडा इंतज़ार करती है।

टूटकर गिर रहे हों सितारे जमीं पर,
उसकी पायल कुछ ऐसे झंकार करती है।

मरने को, मैं तो मरा जा रहा हूँ ,
वजह कोई जीने को बेकरार करती है.

Friday, April 17, 2009


दिल मेरा बादल का टुकडा , हल्का सा , आवारा सा
जाने क्या क्या सोचता है, नासमझ नाकारा सा

जब कभी भी सोचता हूँ, सारे गम खो जाते हैं
मेरी यादों मैं बसा है एक लम्हा ,प्यारा सा

खिलती हुई मुस्कान सा मिलता है मुझको हर सुबह
शाम को घर लौट ता है, थक चुका सा ,हारा सा

सिलसिला शायद कोई, अब शुरू होने को है
आज उनकी आंखों मैं चमका था कोई तारा सा

खुश हुआ या उदास हुआ,एक ग़ज़ल लिखी
जब कोई दिन मेरा ख़ास हुआ ,एक ग़ज़ल लिखी

कोई घुलता था मेरी साँसों में
जब भी यह अहसास हुआ , एक ग़ज़ल लिखी

वो मुझसे दूर दूर रहता था
आज जब पास हुआ ,एक ग़ज़ल लिखी

जो भी पीछे था पीछे छूट गया
सामने दरिया और आकाश हुआ ,एक ग़ज़ल लिखी