मैं कभी खामोश बैठूँ ,कुछ गुनगुनाना जिंदगी
तुझसे अगर मैं दूर भागूँ , पास आना जिंदगी
जाने कितनी मंजिलें हैं , जाने कितने रास्ते
मुझको जाना किस डगर है तू बताना जिंदगी
चाह कर भी मैं कभी इनकार कर पाता नहीं
मैं जरा सीधा सा हूँ और वो सयाना जिंदगी
मैं जितना हूँ बेताब उतना तू बेताब तो नहीं, पर गुमान तो होता ही है ,
मैं तेरी तरफ देख नहीं पाता तो क्या ,तुझ पर मेरा ध्यान् तो होता ही है