Friday, April 17, 2009


दिल मेरा बादल का टुकडा , हल्का सा , आवारा सा
जाने क्या क्या सोचता है, नासमझ नाकारा सा

जब कभी भी सोचता हूँ, सारे गम खो जाते हैं
मेरी यादों मैं बसा है एक लम्हा ,प्यारा सा

खिलती हुई मुस्कान सा मिलता है मुझको हर सुबह
शाम को घर लौट ता है, थक चुका सा ,हारा सा

सिलसिला शायद कोई, अब शुरू होने को है
आज उनकी आंखों मैं चमका था कोई तारा सा

8 comments:

Udan Tashtari said...

आपका हिन्दी चिट्ठाजगत में हार्दिक स्वागत है. आपके नियमित लेखन के लिए अनेक शुभकामनाऐं.

एक निवेदन:

कृप्या वर्ड वेरीफीकेशन हटा लें ताकि टिप्पणी देने में सहूलियत हो. मात्र एक निवेदन है बाकि आपकी इच्छा.

वर्ड वेरीफिकेशन हटाने के लिए:डैशबोर्ड>सेटिंग्स>कमेन्टस>Show word verification for comments?> इसमें ’नो’ का विकल्प चुन लें..बस हो गया..कितना सरल है न हटाना और उतना ही मुश्किल-इसे भरना!! यकीन मानो!!.

परमजीत सिहँ बाली said...

बहुत बढिया रचना है।बधाई स्वीकारें।

alka mishra said...

लिखना तो बहुत अच्छी बात है और हम लिखने की हर कोशिश की सराहना करते हैं,किन्तु मित्र पढ़ना उससे भी अच्छी बात है .क्योंकि पढ़ कर ही आप लिखने के काबिल बनते हैं इसलिए अगर आप लिखने पर एक घंटा खर्च करते हैं तो और ब्लागों को पढने पर भी दो घंटे समय दीजिये ,ताकि आपकी लेखनी में और धार पैदा हो .मेरी शुभकामनाएं व सहयोग आपके साथ हैं
जय हिंद

गोविंद गोयल, श्रीगंगानगर said...

narayan..narayan...narayan

वन्दना अवस्थी दुबे said...

ब्लौग-जगत में आपका स्वागत है..शुभकामनायें.

storyteller said...

thanks for ur comments guys,i need them.

storyteller said...
This comment has been removed by the author.
रचना गौड़ ’भारती’ said...

अछा लिख सकतें है
ब्लोग जगत मे आपका स्वागत है। सुन्दर रचना। मेरे ब्लोग ्पर पधारे।