Tuesday, June 20, 2017

मनाना

बहुत खुश नही होता में तेरे आने के बाद
दिल बैठ क्यों जाता है तेरे जाने के बाद

जाने किस बात पर वो इतना खफा बैठा है
मानता क्यों नही इतना मनाने के बाद

Friday, February 10, 2012

Live life!!

मेरे पलकें उठाने तक
ये लम्हा गुजर जायेगा
तो क्या मजा आएगा

मैं काम का आदमी हूँ
तू मुझे इसलिए चाहेगा
तो क्या मजा आएगा

तुझे हँसाने की कोशिश मैं
तेरा चेहरा उतर जायेगा
तो क्या मजा आएगा

संघर्ष तो करना ही है मगर
संघर्ष मैं ही जीवन गुजर जायेगा
तो क्या मजा आएगा

घर से दूर हूँ मैं रोजी के लिए
मेरा बच्चा एक साल का हो जायेगा
तो क्या मजा आएगा

उसे ग़मों की आदत सी हो गयी है
अब तू उसको सताएगा
तो क्या मजा आएगा

-- कपिल देशराज

Wednesday, August 31, 2011

नशा

किसी नशे के असर में हूँ
जिंदगी के सफ़र में हूँ

सालों से मैं गुमनाम था
बस आज कल खबर मैं हूँ

कटते नहीं दिन आज कल
दो चार दिन से घर में हूँ

अब फ़िक्र कोई होती नहीं ,
मैं इसलिए फिकर में हूँ

Sunday, June 26, 2011

में और तुम...




जब भी में तुमसे बातें करता था
तुम चहकती रहती थी
किसी चिड़िया की तरह
और महकती रहती थी
किसी फूल की तरह
तुम कहती रहती थी वो सब
जो तुम्हें कहना होता था
और मुझे सुनना अच्छा लगता था
में तुम्हारी हाँ में हाँ मिलाता था
दीखाता था ऐसे जैसे में वहीँ रहता हूँ
तुम्हारे शहर में
जबकि में रहता था उस शहर में
जो तुम्हारेशहर के बाद आता है
जहाँ का मौसम थोडा गंभीर है
जहाँ हवाएं थोड़ी धीमे चलतीहैं
पर में तुम्हें अपना पता कभी नहीं बताऊंगा
तुम शायद ढूँढ नहीं पाओगी
कहीं खो जाओगी
इसलिए
में चाहता हूँ
ये सब बस यूँ ही चलता रहे
में तुम्हें सुनता रहूँ
और तुम
चहकती रहो
किसी चिड़िया की तरह
और महकती रहो
किसी फूल की तरह.

Wednesday, October 7, 2009

गजल

गम है क्या , खुशी क्या है
सोचता हूँ , जिंदगी क्या है

एक दौर था वो गुजर गया
मुझे हो रहा अभी क्या है

सब भीड़ में ही चल पड़ें
पहचान फिर नयी क्या है

साधु को सब कुछ है पता
नही जानता बस खुशी क्या है

तेरे होठों पर मुस्कान है
पर आँखों में ये नमी क्या है

गर पूरी हुई वो ख्वाहिश थी
खल रही फिर कमी क्या है

Wednesday, September 30, 2009

गजल

मैं बदल रहा हूँ इस दौर में
भीतर से जल रहा हूँ ,इस दौर में

आने वाले कल का नज़रिया लिए
बीता हुआ कल रहा हूँ ,इस दौर में

तुमने कभी जिनको सोचा नहीं
उन सवालों का हल रहा हूँ ,इस दौर में

परिवार, जिंदगी ,पैसा , करियर
कितने सांचों में ढल रहा हूँ ,इस दौर में

कुछ विचारों की छोटी सी गठरी लिए
तन्हा सा चल रहा हूँ ,इस दौर में

साल दर साल, घड़ी दर घड़ी
बन रहा हूँ ,पिघल रहा हूँ, इस दौर में

एक दिन जिंदगी मुझसे पूछेगी ज़रूर
मैं कितना सफल रहा हूँ , इस दौर में