
खुश हुआ या उदास हुआ,एक ग़ज़ल लिखी
जब कोई दिन मेरा ख़ास हुआ ,एक ग़ज़ल लिखी
कोई घुलता था मेरी साँसों में
जब भी यह अहसास हुआ , एक ग़ज़ल लिखी
वो मुझसे दूर दूर रहता था
आज जब पास हुआ ,एक ग़ज़ल लिखी
जो भी पीछे था पीछे छूट गया
सामने दरिया और आकाश हुआ ,एक ग़ज़ल लिखी
कोई घुलता था मेरी साँसों में
जब भी यह अहसास हुआ , एक ग़ज़ल लिखी
वो मुझसे दूर दूर रहता था
आज जब पास हुआ ,एक ग़ज़ल लिखी
जो भी पीछे था पीछे छूट गया
सामने दरिया और आकाश हुआ ,एक ग़ज़ल लिखी
2 comments:
This is very beautiful...like you!!
Bohot achi hai .
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