कुछ सवालात मुझसे हर बार करती है,
जिंदगी फलसफों से इनकार करती है।
अपने होने का थोडा गुमान हो रहा है ,
एक लड़की मुझे भी प्यार करती है
मौके बहुत मुझको देती है जिंदगी,
यह रूकती है , थोडा इंतज़ार करती है।
टूटकर गिर रहे हों सितारे जमीं पर,
उसकी पायल कुछ ऐसे झंकार करती है।
मरने को, मैं तो मरा जा रहा हूँ ,
वजह कोई जीने को बेकरार करती है.
1 comment:
Ya that is Kapil .
Post a Comment