मैं बदल रहा हूँ इस दौर में
भीतर से जल रहा हूँ ,इस दौर में
आने वाले कल का नज़रिया लिए
बीता हुआ कल रहा हूँ ,इस दौर में
तुमने कभी जिनको सोचा नहीं
उन सवालों का हल रहा हूँ ,इस दौर में
परिवार, जिंदगी ,पैसा , करियर
कितने सांचों में ढल रहा हूँ ,इस दौर में
कुछ विचारों की छोटी सी गठरी लिए
तन्हा सा चल रहा हूँ ,इस दौर में
साल दर साल, घड़ी दर घड़ी
बन रहा हूँ ,पिघल रहा हूँ, इस दौर में
एक दिन जिंदगी मुझसे पूछेगी ज़रूर
मैं कितना सफल रहा हूँ , इस दौर में
4 comments:
Dil se....its very good....but as i always say, complete the thought.
Its very good Kapil .
मैं बदल रहा हूँ इस दौर में
भीतर से जल रहा हूँ ,इस दौर में
आने वाले कल का नज़रिया लिए
बीता हुआ कल रहा हूँ ,इस दौर में
waah....!!
Har sher lajwaab lga ....!!
ग़ज़ल के विषय अच्छे लगे
आप आगरा में हो?
हम जल्दी ही आगरा आने वाले हैं, मिलना.
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