आज सुबह मैं आगरा से दिल्ली लौट रहा था। मैं हमेश ट्रेन से आता था पर आज सुबह जल्दी उठ गया तो सोच बस से चलता हूँ । सोचा था थोड़ा समय बचेगा और सफर और आसान हो जाएगा ।
सफर आसान और सुहाना ही था जब तक मैं दिल्ली के बाहरी इलाके मैं नहीं पहुँचा। जगह का नाम था - बदरपुर बॉर्डर । जो लोग समझते हैं दिल्ली बहुत आधुनिक सहर है, भारत की राजधानी है ,उन्हें दिल्ली के कुछ चुनिन्दा हिस्सों को जरूर देखना चाहिए । ऐसे स्थान मिथकों को तोड़ते हैं और सच्चाई को उजागर करते हैं ।
बदरपुर बॉर्डर पर आज कल दिल्ली मेट्रो का कार्य प्रगति पर है, कितने जोर शोर से भगवान जाने पर उस जगह की भीड़ को देखकर लगता है वहां कुम्भ का मेला लगा हुआ है । खासकर सुबह के समय सड़क पर मौजूद हर इंसान आपको परेशां ही दिखाई देगा और जो गाड़ियों मैं सफर करते हैं वो भी परेशां , जो लोग सड़क पर khaade होते हैं वो बस ,टेंपो आदि के इंतजार मैं परेशां होते हैं और जो गाड़ियों मैं होते हैं वो वहां वहां लगे जाम को देखकर सरकार को ,और न जाने किस किस को कोसते रहते हैं । सड़क के तीन चौथाई भाग पर मेट्रो का काम चल रहा है baaki १/४ भाग पर रोजमर्रा की जिंदगी । जिंदगी या तो thahari रहती है या फिर रेंग रेंग कर चलती है । तेज धुप और धूल ,आग मैं घी का काम करते है
ऐसा lagtaa है सब रुके हुए हैं जैसे किसी बाँध मैं पानी रुका रहता है , फर्क सिर्फ़ यह है की इस तरह के बाँध उर्जा पैदा नहीं करते , उर्जा सोख लेते हैं ।
भारत मैं निर्माण कार्य तो होते हैं पर उन निर्माण कार्यों से होने वाली असुविधाओं पर कोई ध्यान नहीं देता । सरकार को इस बात का ध्यान तो रहता है की निर्माण कार्यों के लिए जगह चाहिए लेकिन सब ये बात भूल जाते हैं की भारत की जनसँख्या कितनी है badarpur border जैसे व्यस्त इलाकों से roj gujarne वाले लोगों और वाहनों का क्या होगा ?यातायात व्यवस्था कैसे चलेगी? बस सब चलता रहता है , अब इसमें कोई लेट हो ,जाम मैं फसे , किसी को कोसे , बीमार पड़े किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता ।
सब लोग अपनी तरफ़ से अच्छी तरह से तैयार होके अपने घर से ऑफिस के लिए निकलते हैं लेकिन ऑफिस तक पहुँचते पहुँचते उनकी क्या हालात होती है ये कई चीजों पर निर्भर करता ।
nirmaan कार्य पश्चिमी तरीके से हो रहा है लेकिन यातायात व्यवस्था देशी तरीके से चल रही है और आम आदमी इसे अपना भाग्य समझ कर संघर्ष कर रहा है , सब jee रहे हैं , अपनी ही samasyaon से घिरे हुए हैं ।
विकास अगर एकतरफा होता है तो वह संतुलन को प्रभावित करता है। ऐसी विषम परिस्थितियां ही इंसान को महान बनाती हैं , शायद हमारी सरकार चाहती है की दिल्ली महान लोगों का सहर बने ।
कोई भी आम इंसान अगर नौकरी के समय अपना पुरा काम मानसिक शान्ति के साथ करना चाहे तो यह इस बात पर बहुत निर्भर करता है की वह ऑफिस आने और जाने मैं कितना समय बिताता है और कितना संघर्ष करता है ।
एक आम इंसान की तरह मुझे भी समस्याएं ही दिखाई दे रही हैं समाधान नहीं लेकिन समाधान भी अवश्य होगा , जरूरत है है उसे खोजने की।
मैंने कई लोगों को देखा है , अच्छे कपड़े पहने ,चहेरे पर ताजगी और चमक , भविष्य के प्रति बहुत आशावान , परन्तु एक समस्या , उन्हें भी बदरपुर बॉर्डर से दिल्ली की तरफ़ जाना होता ।
देश की abaadi बहुत ज्यादा है और पता नहीं इसमें किसका dosh है लेकिन सरकार को हमेशा ये बात ध्यान मैं rakhni चाहिए की कोई भी कार्य शुरू करने से pahle इस बात का ध्यान रहे की pahle से ही sangarsh कर रहे आम आदमी को और sanghaarsh नही करना पड़े ,अगर हर pahlu पर ध्यान दिया जाए तो samasyaon का समाधान निकल सकता है , बस जरूरत है थोड़ा maanviya थोड़ा sanvedansheel होने की। इस से shayaad हालात थोड़े sudhar jaayein वरना सब कुछ तो चल ही रहा है........raam भरोसे!
1 comment:
एक रशियन राजदूत जो बाद में रूस के विदेश मंत्री भी बने ने अपनी भारत पोस्टिंग से निवृत होकर जाने से पहले एक प्रेस वार्ता में एक संवाद दाता के इस सवाल का जवाब देते हुए कहा था
संवाददाता-भारत मे आपका अनुभव
राजदूत-मैं जब भारत आया तो भगवान को नहीं मानता था अब मानने लगा हूं
संवा---आपने किस आध्यात्मिक गुरू की शरण में यह अनुभव प्राप्त किया
राज-किसी की नहीं ,मगर जिस देश में नेता-अफ़सर कोई भी अपना काम नहीं करता और यह देश चल रहा है तो अवश्य राम भरोसे ही चल रहा है।
अभी ३ माह की योरोप यात्रा से लौटा हूं ,वहां जिस फ़्लैट में हम रह रहे थे एक दिन नोटिस पढा-कि परसों ११ अगस्त को hot water supply एक घंटे ११-१२ ए एम तक बंद रहेगी ब्यालर की देख भाल हेतु और ४० मिंट बाद गर्म पानी शुरू हो गया
२-जेनेवा से पेरिस कार से जाते हुए GPS व F.M radio par सूचना मिली ५० कि,मीटर आगे सड़क पर व्यवधान है ,वहां पहुंचने पर पाया एक कार खराब थी जिसे क्रेन ने सरका कर एक ओर किया था बस
आप ठीक कह रहे हैं हमारी समस्या हमारी संख्या व चुनाव में जात-पात धर्म का प्रभाव,
पर अब युवा पीढी वोट देने लगी है तो आशा बंधती है;
आपने एक सही मुद्आ ऊठाया है बधाई
मेरी गज़ल पर टिपण्णी हेतु आभार
श्याम सखा श्याम
http://gazalkbahane.blogspot.com/
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