
जब से खोया उसे कुछ भी पाया नहीं
हादसों ने मुझे कुछ सिखाया नहीं
एक कागज पे मैंने वो सब लिख दिया
मेरे सीने मैं जो कुछ समाया नहीं
आज सूरज वही रोज जैसा उगा
रौशनी मैं मगर मैं नहाया नहीं
रास्ते की तरफ़ देखता मैं रहा
उसको आना न था , वो आया नहीं
जिंदगी यूँ गुजारी अजब ढंग से
काम पूरा किया , दिल लगाया नहीं
हादसों ने मुझे कुछ सिखाया नहीं
एक कागज पे मैंने वो सब लिख दिया
मेरे सीने मैं जो कुछ समाया नहीं
आज सूरज वही रोज जैसा उगा
रौशनी मैं मगर मैं नहाया नहीं
रास्ते की तरफ़ देखता मैं रहा
उसको आना न था , वो आया नहीं
जिंदगी यूँ गुजारी अजब ढंग से
काम पूरा किया , दिल लगाया नहीं
जितने शिकवे रहे मेरे दिल मैं रहे
मैंने उसको कभी कुछ बताया नहीं
वक्त को थाम लूँ , ऐसी कोशिश करी
हाथ आना न था ,हाथ आया नहीं
मुझ से नाराज वो उम्र भर यूँ रहा
दूर जा न सका, पास आया नहीं
5 comments:
gud going dude...
sahi jaa raha hai...
Woh jo na keh saka, maine sun liya,
jo na usey dikha, mein woh khwab tha,
na tha khwabon mein use yakeen,
maine bhi sunke, ansuna kiya..
kuch yehi raha afsaana hamare pya ka,
jo na khatam hua, na shuru hi tha!!
Realy great .
जिंदगी यूँ गुजारी अजब ढंग से
काम पूरा किया , दिल लगाया नहीं
सुन्दर गजल
मक्ता बहुत पसंद आया
वीनस केसरी
gr8 bhai..gr8..
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