दुःख होता है कभी -कभी
जब झूठ बोलता हूँ
ऐसे या वैसे
करता हूँ वो काम
जो मुझे नहीं करने चाहिए
खरा उतरता हूँ उपेक्षाओं पर
कितनी अजीब बात है
मैं जागरूक हूँ
मगर क्या फायदा
मैं सब कुछ बदलना चाहता हूँ
पर शायद अभी नहीं बदल सकता
इसीलिए कोशिश कर रहा हूँ
एक मध्यम मार्ग खोजने की
कितनी ही लोग
मेरी तरह ही सोचते होंगे
और
तलाशते होंगे सही मार्ग
उस से ही सारा अन्तर होगा
तब तक संगर्ष जारी है
एक बहाने के साथ , की
मैं भी इंसान हूँ
1 comment:
realy a nice one, i want to know the reason that why you wrote this and what is the story behind this philosophy.
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